भारत में एकीकृत जराचिकित्सा: सामान्य स्वास्थ्य देखभाल से विशिष्ट जरा-केंद्रित मॉडल तक की यात्रा
जराचिकित्सा देखभाल (Geriatric Care) क्या है और यह सामान्य स्वास्थ्य देखभाल से किस प्रकार भिन्न है?
जराचिकित्सा: उम्र बढ़ने की विशिष्ट चुनौतियों के लिए एक विशेषज्ञ दृष्टिकोण
भारत में वृद्ध जनसंख्या तेजी से बढ़ रही है, और इसके साथ ही उनकी स्वास्थ्य संबंधी जरूरतें भी अधिक जटिल होती जा रही हैं। उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में, जहाँ जनसंख्या का घनत्व अधिक है, बुजुर्गों की देखभाल एक विशेष चिकित्सा आवश्यकता बन गई है। जराचिकित्सा (Geriatric Care) चिकित्सा विज्ञान की वह विशेष शाखा है जो वृद्ध व्यक्तियों (आमतौर पर 65 वर्ष से अधिक) के स्वास्थ्य पर केंद्रित है। इसका लक्ष्य केवल बीमारियों का इलाज करना नहीं है, बल्कि उनकी स्वतंत्रता (Independence) और जीवन की समग्र गुणवत्ता को बनाए रखना है 1।
सामान्य देखभाल से मौलिक अंतर
जराचिकित्सा देखभाल सामान्य स्वास्थ्य देखभाल (General Primary Care) से कई मायनों में भिन्न होती है। एक सामान्य चिकित्सक आमतौर पर एक समय में एक रोग या अंग पर ध्यान केंद्रित करता है, लेकिन बुजुर्गों की जटिलताओं के लिए यह दृष्टिकोण अक्सर अपर्याप्त होता है।
1. बहु-रुग्णता का प्रबंधन (Multimorbidity Management):
बुजुर्गों में अक्सर बहु-रुग्णता (दो या दो से अधिक पुरानी बीमारियों का एक साथ होना) पाई जाती है। भारत में, एक औसत बुजुर्ग व्यक्ति 2 से 3 पुरानी बीमारियों से ग्रस्त होता है 6। जराचिकित्सा चिकित्सक मधुमेह, हृदय रोग और गठिया जैसी स्थितियों के जटिल तालमेल को समझते हैं और परस्पर विरोधी उपचारों से बचते हुए समन्वित प्रबंधन प्रदान करते हैं ।
2. कार्यात्मक स्थिति पर ध्यान (Focus on Functional Status):
जराचिकित्सा का केंद्रीय मापदंड रक्तचाप या रक्त शर्करा के स्तर के बजाय कार्यात्मक स्थिति (Functional Status) है 3। कार्यात्मक स्थिति यह मापती है कि व्यक्ति अपने दैनिक कार्य (चलना, नहाना, खाना) कितनी कुशलता से कर सकता है 4। जराचिकित्सा का लक्ष्य प्रयोगशाला परिणामों को आदर्श बनाने के बजाय व्यक्ति की गतिशीलता और स्वतंत्रता को अधिकतम करना है 2। यदि कोई उपचार किसी लैब वैल्यू को सुधारता है लेकिन गिरने (Falls) का खतरा बढ़ा देता है, तो जराचिकित्सा में उसे असफल माना जाता है।
3. पॉलीफ़ार्मेसी का खतरा (The Risk of Polypharmacy):
बहु-रुग्णता के कारण, बुजुर्ग अक्सर पाँच या अधिक दवाएं (पॉलीफ़ार्मेसी) लेते हैं, जिससे प्रतिकूल दवा प्रतिक्रियाओं (Adverse Drug Reactions), गिरने, और दुर्बलता (Frailty) का खतरा बढ़ जाता है । जराचिकित्सा में दवाओं की गहन समीक्षा (Medication Review) और अनावश्यक दवाओं को बंद करने (Deprescribing) पर जोर दिया जाता है, क्योंकि बुजुर्गों के शरीर में दवाओं का असर बदल जाता है ।
4. विशिष्ट उपचार लक्ष्य (Tailored Treatment Goals):
बुजुर्गों के लिए उपचार के लक्ष्य सामान्य वयस्कों से भिन्न होते हैं। उदाहरण के लिए, मधुमेह वाले वृद्ध व्यक्ति में रक्तचाप के लक्ष्य को कम कठोर रखा जाता है (जैसे <140–150/90 mmHg) ताकि बैठने या खड़े होने पर अत्यधिक रक्तचाप गिरने (Orthostatic Hypotension) और उससे जुड़े गिरने के जोखिम से बचा जा सके ।
5. समग्र मूल्यांकन (Holistic Assessment):
जराचिकित्सा एक व्यापक जराचिकित्सा मूल्यांकन (Comprehensive Geriatric Assessment - CGA) का उपयोग करती है। इसमें न केवल शारीरिक स्वास्थ्य, बल्कि संज्ञानात्मक स्वास्थ्य, मानसिक स्वास्थ्य (भारत में 71.1% तक महिलाओं में अवसाद पाया गया है 6), सामाजिक समर्थन, पोषण और गिरने के जोखिम जैसे सभी आयाम शामिल होते हैं ।
आयुर्वेद का एकीकृत दृष्टिकोण
उत्तर प्रदेश जैसे सांस्कृतिक रूप से समृद्ध क्षेत्र के चिकित्सक के रूप में, आयुर्वेद के सिद्धांत इस देखभाल को और बेहतर बना सकते हैं। आयुर्वेद की जरा चिकित्सा (या रसायन चिकित्सा) का उद्देश्य रसायन उपचारों, सही आहार-विहार (जीवनशैली) और योग के माध्यम से जीवन की गुणवत्ता और प्रतिरक्षा को बढ़ाना है । आधुनिक चिकित्सा के निदान के साथ इन प्राचीन सिद्धांतों का समन्वय करके, हम बुजुर्गों के लिए एक ऐसा देखभाल मॉडल प्रदान कर सकते हैं जो उनकी शारीरिक, मानसिक और सामाजिक आवश्यकताओं को पूरा करे।
यह विशेषज्ञ देखभाल यह सुनिश्चित करती है कि हमारे बुजुर्ग अपने सुनहरे वर्षों में स्वतंत्रता, सम्मान और सर्वोत्तम संभव स्वास्थ्य का आनंद लें।
सामान्य देखभाल और जराचिकित्सा में मौलिक अंतर
बहु-रुग्णता (Multimorbidity) का केंद्रीय महत्व
सामान्य प्राथमिक देखभाल (Routine Adult Care) आमतौर पर रोग-उन्मुख होती है, जिसका अर्थ है कि चिकित्सक एक विशिष्ट "सूचकांक" बीमारी (Index Condition) पर ध्यान केंद्रित करते हैं, और अन्य सह-रुग्णताओं (Comorbidities) को उसी के संदर्भ में देखते हैं । इसके विपरीत, जराचिकित्सा बहु-रुग्णता (Multimorbidity) को केंद्र में रखती है। बहु-रुग्णता का अर्थ है दो या दो से अधिक दीर्घकालिक (क्रोनिक) बीमारियों का एक साथ मौजूद होना, जहाँ किसी भी स्थिति को दूसरे पर प्राथमिकता नहीं दी जाती है ।
बहु-रुग्णता 65 वर्ष से अधिक उम्र के आधे से अधिक व्यक्तियों को प्रभावित करती है । भारत में, प्रति व्यक्ति 2 से 3 रुग्णताओं की औसत संख्या इस बात की पुष्टि करती है कि जराचिकित्सा में उपचार को हमेशा कई परस्पर जुड़ी हुई स्थितियों के संदर्भ में समन्वित किया जाना चाहिए 6। जराचिकित्सा देखभाल जटिल अंतःक्रियाओं पर ध्यान केंद्रित करती है, ताकि एक बीमारी का इलाज दूसरे को नकारात्मक रूप से प्रभावित न करे, जिससे समग्र स्वास्थ्य लक्ष्य प्राप्त किए जा सकें 22। यह दृष्टिकोण जटिल मामलों में व्यक्ति-केंद्रित देखभाल सुनिश्चित करता है, जो पारंपरिक रोग-केंद्रित मॉडल में अक्सर छूट जाता है।
कार्यात्मक स्थिति (Functional Status) का मूल्यांकन: जराचिकित्सा का मुख्य आधार
सामान्य वयस्क देखभाल में सफलता के प्राथमिक उपाय प्रयोगशाला परिणाम, रक्तचाप नियंत्रण या रोग-विशिष्ट मार्कर होते हैं। हालांकि, जराचिकित्सा में मापन का मानदंड पूरी तरह से बदल जाता है। जराचिकित्सा का केंद्रीय सिद्धांत कार्यात्मक स्थिति (Functional Status) का मूल्यांकन है 2। कार्यात्मक स्थिति किसी व्यक्ति की दैनिक गतिविधियों (Activities of Daily Living - ADL) जैसे नहाना, कपड़े पहनना, या सहायक दैनिक गतिविधियों (Instrumental Activities of Daily Living - IADL) जैसे घर का काम, खरीदारी और दवा प्रबंधन को स्वतंत्र रूप से करने की क्षमता को दर्शाती है 4।
एक व्यापक जराचिकित्सा मूल्यांकन (CGA) में पोषण, दृष्टि, श्रवण, संतुलन, और सामाजिक वातावरण की समीक्षा शामिल होती है, जो सामान्य चिकित्सा मूल्यांकन का हिस्सा नहीं होते हैं 16। कार्यात्मक स्वतंत्रता (Functional Independence) को बनाए रखना जराचिकित्सा देखभाल का सबसे महत्वपूर्ण लक्ष्य है, जो स्वस्थ उम्र बढ़ने को बढ़ावा देता है 3। यदि कोई चिकित्सा हस्तक्षेप किसी बीमारी के मार्कर को सुधारता है, लेकिन गतिशीलता को सीमित करता है या गिरने का खतरा बढ़ाता है, तो वह जराचिकित्सा के संदर्भ में विफल माना जाता है।
औषधि प्रबंधन में विशेषज्ञता: पॉलीफ़ार्मेसी का खतरा
जराचिकित्सा देखभाल और सामान्य देखभाल के बीच सबसे महत्वपूर्ण अंतरों में से एक औषधि प्रबंधन में विशेषज्ञता है। वृद्ध व्यक्तियों में पॉलीफ़ार्मेसी (नियमित रूप से पाँच या अधिक दवाएं लेना) व्यापक रूप से प्रचलित है 11। भारत में भी पॉलीफ़ार्मेसी की उच्च दर पाई गई है .
पॉलीफ़ार्मेसी के नकारात्मक परिणाम गंभीर होते हैं, जिनमें प्रतिकूल दवा प्रतिक्रियाओं में वृद्धि, गिरने, दुर्बलता (Frailty), खराब उपचार पालन, अस्पताल में भर्ती होने में वृद्धि और मृत्यु दर में वृद्धि शामिल है ।
जराचिकित्सा विशेषज्ञता की आवश्यकता इसलिए है क्योंकि उम्र के साथ शरीर की शारीरिक क्रियाएँ बदल जाती हैं—गुर्दे और यकृत की निकासी क्षमता कम हो जाती है, और शरीर की संरचना में परिवर्तन होता है। इसका मतलब है कि मानक वयस्क दवा खुराकें बुजुर्गों में अप्रत्याशित रूप से कार्य कर सकती हैं, जिससे जटिल दवा अंतःक्रियाएं और दुष्प्रभाव पैदा होते हैं, जो अक्सर संज्ञानात्मक गिरावट या गिरने जैसे जराचिकित्सा सिंड्रोम का कारण बनते हैं 12। इसके अलावा, 65 वर्ष से अधिक आयु के रोगी अक्सर दवा परीक्षणों में अच्छी तरह से प्रतिनिधित्व नहीं करते हैं, जिससे सामान्य जोखिम बनाम लाभ मूल्यांकन जटिल हो जाता है । जराचिकित्सा देखभाल इसलिए गहन दवा समीक्षा और अनावश्यक या हानिकारक दवाओं को बंद करने (Deprescribing) पर ध्यान केंद्रित करती है, यह मानते हुए कि कभी-कभी अनावश्यक हस्तक्षेप से बचना ही बेहतर चिकित्सा होती है 13।
रोग प्रबंधन के लक्ष्य: जीवन-विस्तार बनाम स्वास्थ्य-विस्तार
सामान्य वयस्क देखभाल के दिशानिर्देश अक्सर आक्रामक उपचार लक्ष्यों (जैसे, बहुत कम रक्तचाप) को अनिवार्य करते हैं। जराचिकित्सा में, रोगी की नाजुकता और सह-रुग्णता को देखते हुए इन लक्ष्यों को संशोधित किया जाता है। जराचिकित्सा में, लक्ष्य जीवन-विस्तार (Lifespan) के बजाय स्वास्थ्य-विस्तार (Healthspan) और जीवन की गुणवत्ता सुनिश्चित करना होता है 9।
उदाहरण के लिए, वृद्ध मधुमेह रोगियों में, बहुत सख्ती से रक्तचाप को कम करना हानिकारक हो सकता है, जिससे ऑर्थोस्टेटिक हाइपोटेंशन (खड़े होने पर रक्तचाप गिरना) और परिणामस्वरूप गिरने का खतरा बढ़ जाता है 14। दिशानिर्देश अक्सर वृद्ध मधुमेह रोगियों में रक्तचाप को कम आक्रामक सीमा, जैसे <140–150/90 mmHg, तक रखने की सलाह देते हैं, बशर्ते रोगी अच्छी स्थिति में हो 14। उपचार को विशेष रूप से बैठने और खड़े होने की स्थिति में रक्तचाप की बारीकी से निगरानी करने के लिए अनुकूलित किया जाता है ताकि अत्यधिक गिरावट को रोका जा सके 15। उपचार के लक्ष्यों की यह अनुरूपता कार्यात्मक परिणामों को नैदानिक मार्करों पर प्राथमिकता देने के जराचिकित्सा सिद्धांत को दर्शाती है।
जराचिकित्सा संबंधी सिंड्रोम और भारत में उनकी व्यापकता
जराचिकित्सा सिंड्रोम (Geriatric Syndromes) वे जटिल स्वास्थ्य स्थितियाँ हैं जो कई अंतर्निहित जोखिम कारकों और शरीर प्रणालियों की दुर्बलता से उत्पन्न होती हैं। ये सिंड्रोम तीव्र कार्यात्मक गिरावट और अस्पताल में भर्ती होने का प्रमुख कारण बनते हैं, और सामान्य वयस्क चिकित्सा द्वारा अक्सर अपर्याप्त रूप से प्रबंधित किए जाते हैं।
दुर्बलता (Frailty), गिरना (Falls), और कार्यात्मक हानि (Functional Loss)
दुर्बलता (Frailty) एक ऐसी भेद्यता की स्थिति है जो वृद्ध वयस्कों में आम है। भारतीय संदर्भ में दुर्बलता की व्यापकता विशेष रूप से चिंताजनक है, जहाँ 60 वर्ष से अधिक आयु वर्ग में 43.2% लोगों में दुर्बलता पाई गई है 24। दुर्बलता अस्पताल में भर्ती होने (2.4 गुना अधिक जोखिम), गिरने (2.17 गुना अधिक जोखिम), और खराब संज्ञानात्मक कार्य से जुड़ी है 24।
गिरना (Falls) बुजुर्गों में रुग्णता और मृत्यु दर का एक प्रमुख कारण है। यह पाया गया है कि पॉलीफ़ार्मेसी और दवाओं की प्रतिकूल प्रतिक्रियाएं गिरने के जोखिम को बढ़ाती हैं 12। अध्ययन बताते हैं कि 20% प्रतिभागियों में विभिन्न कारणों से कार्यात्मक हानि (Functional Loss) पाई गई थी, जो यह दर्शाता है कि जराचिकित्सा देखभाल में कार्यात्मक गिरावट को रोकना एक आवश्यक नैदानिक कार्य है 25।
दुर्बलता, पॉलीफ़ार्मेसी और गिरने के बीच एक खतरनाक संबंध है जिसे "जराचिकित्सा कैस्केड" (Geriatric Cascade) के रूप में समझा जा सकता है। पॉलीफ़ार्मेसी गिरने और दुर्बलता के जोखिम को बढ़ाती है 12। दुर्बलता अस्पताल में भर्ती होने के जोखिम को बढ़ाती है 24। अस्पताल में भर्ती होना अक्सर तीव्र कार्यात्मक गिरावट, उच्च रुग्णता और अंततः मृत्यु दर में वृद्धि की ओर ले जाता है। इसलिए, जराचिकित्सा विशेषज्ञों की प्राथमिक भूमिका इस कैस्केड को तुरंत रोकना और उलटना है।
भारत में सबसे आम जराचिकित्सा संबंधी रुग्णता: आँकड़ों का विश्लेषण
भारत में बुजुर्गों के स्वास्थ्य पर किए गए अध्ययनों से रुग्णता का एक विशिष्ट पैटर्न सामने आता है, जो विशेष देखभाल की मांग करता है:
संवेदी और मस्कुलोस्केलेटल बोझ: भारतीय बुजुर्गों में मोतियाबिंद (Cataract) और आर्थोपेडिक समस्याएं/मस्कुलोस्केलेटल समस्याएं (Orthopedic Problems) सबसे आम रुग्णताओं में से हैं, जिनकी व्यापकता 50.4% तक है 6। मस्कुलोस्केलेटल समस्याएं पुरुषों की तुलना में महिलाओं में काफी अधिक पाई जाती हैं (महिलाओं में 66.7% बनाम पुरुषों में 42.7%) 7। श्रवण हानि (Hearing loss) भी 9.6% बुजुर्गों को प्रभावित करती है 6।
पुरानी बीमारी की व्यापकता: उच्च रक्तचाप (Hypertension) 20.9% बुजुर्गों में पाया जाता है 6। यह शहरी बुजुर्गों में विशेष रूप से उच्च है (56% तक) 7। मधुमेह 17.4% को प्रभावित करता है 6।
मानसिक स्वास्थ्य संकट: बुजुर्गों में मानसिक स्वास्थ्य की स्थिति गंभीर है। एक अध्ययन में महिलाओं में अवसाद (Depression) की व्यापकता 71.1% तक पाई गई, जो बुजुर्ग महिलाओं में गंभीर, अक्सर अनदेखी की गई, मनोसामाजिक संकट को दर्शाता है 6।
यह डेटा स्पष्ट रूप से दिखाता है कि स्वास्थ्य सेवा योजना, जागरूकता अभियान और नीति विकास (विशेष रूप से मनोसामाजिक सहायता और हड्डी रोग पुनर्वास के संबंध में) को विशेष रूप से वृद्ध भारतीय महिलाओं द्वारा वहन किए जा रहे उच्च रुग्णता भार को संबोधित करने के लिए तैयार किया जाना चाहिए।
मनोसामाजिक स्वास्थ्य और सामाजिक समर्थन की आवश्यकता
जराचिकित्सा देखभाल में एक समग्र दृष्टिकोण अपनाया जाना चाहिए जो न केवल शारीरिक स्वास्थ्य बल्कि मानसिक, भावनात्मक और सामाजिक कल्याण का भी पोषण करता हो 20। अवसाद की अत्यधिक दरें (महिलाओं में 71.1% तक) स्वास्थ्य प्रणाली की सामाजिक निर्धारकों को संबोधित करने में विफलता को रेखांकित करती हैं 6। जराचिकित्सा नर्सिंग सहायक जैसी भूमिकाएं दैनिक गतिविधियों में सहायता, महत्वपूर्ण संकेतों की निगरानी, और साथ ही साथ भावनात्मक साथी प्रदान करने में महत्वपूर्ण हैं, जो बुजुर्गों के कल्याण और आराम को बनाए रखने के लिए अभिन्न हैं 1।
व्यापक जराचिकित्सा मूल्यांकन (Comprehensive Geriatric Assessment - CGA) के प्रमुख घटक
CGA जराचिकित्सा देखभाल का मानक है। यह पारंपरिक चिकित्सा इतिहास के सभी पहलुओं को एकीकृत करता है, लेकिन इसे विशेष रूप से बुजुर्गों के लिए अनुकूलित किया जाता है 17। CGA एक व्यक्ति-केंद्रित देखभाल योजना बनाने में मदद करता है जो उनकी शारीरिक, भावनात्मक और सामाजिक आवश्यकताओं का समर्थन करती है 16।
CGA में प्रमुख रूप से निम्नलिखित शामिल होते हैं: वर्तमान लक्षण और कार्यात्मक प्रभाव की समीक्षा; पिछले और वर्तमान चिकित्सा इतिहास और दवाओं की समीक्षा; संज्ञानात्मक और मानसिक स्वास्थ्य स्थिति का आकलन; कार्यात्मक और गतिशीलता का आकलन (ADL/IADL); सामाजिक वातावरण और देखभाल करने वाले नेटवर्क की समीक्षा; वित्तीय और मनोसामाजिक समर्थन का आकलन; और देखभाल के लक्ष्य तथा अग्रिम प्राथमिकताओं की खोज 16। मूल्यांकन के दौरान पोषण, दृष्टि, श्रवण, असंयम, संतुलन और गिरने की रोकथाम, ऑस्टियोपोरोसिस, और पॉलीफ़ार्मेसी जैसे विशिष्ट जराचिकित्सा विषयों पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए 17।
एक एकीकृत नैदानिक सेटिंग में, CGA एक आवश्यक डेटा नींव के रूप में कार्य करता है। यह शारीरिक, संज्ञानात्मक, मनोवैज्ञानिक और सामाजिक डोमेन में डेटा एकत्र करता है, जिससे चिकित्सक उन क्षेत्रों की पहचान कर सकता है जहाँ आधुनिक औषधीय समाधान (उच्च पॉलीफ़ार्मेसी लोड) बोझिल हो सकते हैं, और जहाँ आयुर्वेदिक जीवनशैली हस्तक्षेप (आहार-विहार, योग, मानसिक कल्याण अभ्यास) सबसे बड़ा चिकित्सीय लाभ प्रदान कर सकते हैं 26।
दवाओं का अनुकूलन और वि-पर्चीकरण (Optimization and Deprescribing) की रणनीति
पॉलीफ़ार्मेसी के उच्च जोखिम को देखते हुए, जराचिकित्सा में वि-पर्चीकरण (Deprescribing) को सक्रिय रूप से बढ़ावा दिया जाता है। नियमित दवा समीक्षा, वर्ष में कम से कम एक बार, अनावश्यक दवाओं को कम करने और बेहोशी या गिरने के जोखिम जैसी जटिलताओं को कम करने के लिए आवश्यक है 13।
पॉलीफ़ार्मेसी के जोखिम को कम करने के उपायों में चिकित्सकों के बीच जागरूकता बढ़ाना, दवा प्रबंधन और पालन में सुधार करना, स्व-दवा (Self-medication) को कम करने के प्रयास करना, और अनुचित क्रॉसपैथी (विभिन्न प्रणालियों का असंगठित उपयोग) से बचना शामिल है 23। जराचिकित्सा चिकित्सकों को यह सुनिश्चित करना होता है कि उपचार में "कम ही अधिक है" (less is more) का सिद्धांत लागू हो, जहाँ अनावश्यक हस्तक्षेप से बचना, विशेष रूप से उच्च जोखिम वाले सिंड्रोम के लिए, बेहतर नैदानिक परिणाम देता है।
उच्च रक्तचाप और मधुमेह के लिए विशिष्ट जराचिकित्सा उपचार लक्ष्य
जराचिकित्सा दिशानिर्देश सामान्य वयस्क दिशानिर्देशों से अलग होते हैं क्योंकि वे रोगी की समग्र कार्यात्मक स्थिति को प्राथमिकता देते हैं। उदाहरण के लिए, वृद्ध उच्च रक्तचाप और मधुमेह वाले रोगियों में, ऑर्थोस्टेटिक हाइपोटेंशन (Orthostatic Hypotension) को रोकने के लिए रक्तचाप के लक्ष्य कम सख्त होते हैं 14।
अमेरिकन गेरियाट्रिक्स सोसाइटी जैसी संस्थाएं भी वृद्ध रोगियों में रक्तचाप को <140/90 mmHg तक रखने की सिफारिश करती हैं 14। इसके अलावा, ऑर्थोस्टेटिक हाइपोटेंशन (जो गिरने का कारण बन सकता है) को रोकने के लिए, बैठने और खड़े होने दोनों स्थितियों में रक्तचाप के स्तर की बारीकी से निगरानी की जानी चाहिए, और उपचार को अत्यधिक रक्तचाप गिरने से रोकने के लिए अनुकूलित किया जाना चाहिए 14। यह प्रक्रियात्मक विवरण (पोस्टुरल महत्वपूर्ण संकेतों की जांच करना) जराचिकित्सा में एक उच्च-उपज निवारक उपाय है, जो कार्यात्मक स्वतंत्रता बनाए रखने के मुख्य लक्ष्य को सीधे संबोधित करता है।
कार्यात्मक मूल्यांकन उपकरण: ADL और IADL का उपयोग
कार्यात्मक स्थिति को अनुकूलित करना जराचिकित्सा अभ्यास का एक मूलभूत सिद्धांत है 2। नैदानिक मूल्यांकन में मानकीकृत उपकरण जैसे कैट्ज़ इंडेक्स (दैनिक जीवन की गतिविधियों - ADL के लिए) और लॉटन स्केल (सहायक दैनिक जीवन की गतिविधियों - IADL के लिए) का उपयोग किया जाता है ताकि स्वतंत्रता के स्तर और आवश्यक सामाजिक समर्थन का आकलन किया जा सके 4। कार्यात्मक हानि के दस्तावेज़ीकरण के बिना, यह आकलन करना असंभव है कि क्या जराचिकित्सा के लक्ष्य प्राप्त किए गए हैं 2।
जराचिकित्सा में आयुर्वेद का समग्र योगदान
भारत में जराचिकित्सा के लिए एक मजबूत मॉडल बनाने के लिए आधुनिक जराचिकित्सा विज्ञान और आयुर्वेद की जरा चिकित्सा (जरा चिकित्सा या रसायन चिकित्सा) के सिद्धांतों का एकीकरण आवश्यक है।
जरा (Jara) और वृद्धावस्था (Vriddhavastha) की आयुर्वेदिक अवधारणाएँ
आयुर्वेद, जिसे जीवन के विज्ञान के रूप में जाना जाता है, उम्र बढ़ने (जरा) को एक रोग प्रक्रिया के रूप में नहीं, बल्कि एक प्राकृतिक और अपरिहार्य प्रगति के रूप में देखता है, जहाँ मन और शरीर को स्वस्थ बनाए रखा जा सकता है 28। आयुर्वेद की आठ विशिष्ट शाखाओं में से, सातवीं शाखा रसायन चिकित्सा (Rasayana Chikitsa) या जरा चिकित्सा है, जो कायाकल्प, पोषण, प्रतिरक्षा विज्ञान और जराचिकित्सा से संबंधित है । आयुर्वेद का उद्देश्य केवल जीवन के वर्षों को बढ़ाना नहीं है, बल्कि जीवन की गुणवत्ता और आत्मनिर्भरता में सुधार करना है ।
रसायन चिकित्सा (Rasayana Chikitsa) का सिद्धांत और अनुप्रयोग
रसायन चिकित्सा आयुर्वेद का जराचिकित्सा में अद्वितीय योगदान है । रसायन वे उपाय (दवाएं और गैर-दवाएं जैसे जीवनशैली अभ्यास) हैं जो सर्वोत्तम गुणवत्ता वाले ऊतकों (धातुओं) को प्राप्त करने में मदद करते हैं, जिससे प्रतिरक्षा में सुधार होता है और रोगों का उपचार होता है 19। जराचिकित्सा में इसका मुख्य लक्ष्य कम रुग्णता के साथ स्वस्थ उम्र बढ़ना है
रसायन चिकित्सा के लाभों में दीर्घायु, अच्छी स्मृति, अच्छी बुद्धि, इष्टतम स्वास्थ्य, शारीरिक और इंद्रियों की शक्ति, और चमक शामिल हैं । उदाहरण के लिए, अश्वगंधा (Withania somnifera) एक अत्यधिक प्रशंसित रसायन है, जो वात को कम करने, सभी सात धातुओं को पोषण देने, ओजस को बढ़ावा देने, स्मृति बढ़ाने और शारीरिक/मानसिक तनाव को कम करने में उत्कृष्ट है 28।
आयुर्वेद में रसायन के प्रशासन से पहले शोधन (पंचकर्म प्रक्रियाओं द्वारा शरीर को शुद्ध करना) के महत्व पर जोर दिया गया है, ताकि रसायन का लाभ शरीर की कोशिकाओं द्वारा पूरी तरह से अवशोषित हो सके । यह आधुनिक चिकित्सा के इस विचार के समानांतर है कि किसी भी लक्षित चिकित्सा शुरू करने से पहले प्रणालीगत स्वास्थ्य को अनुकूलित किया जाना चाहिए।
आयुर्वेद के लाभ (संज्ञानात्मक वृद्धि, शक्ति, प्रतिरक्षा) जराचिकित्सा मूल्यांकन (CGA) द्वारा पहचाने गए प्रमुख घाटे (दुर्बलता, संज्ञानात्मक हानि, कार्यात्मक हानि) के साथ पूरी तरह से संरेखित होते हैं। यह संरेखण जराचिकित्सा देखभाल योजना में रसायन चिकित्सा के एकीकरण के लिए एक साक्ष्य-आधारित औचित्य बनाता है।
आहार-विहार और दिनचर्या का महत्व
आयुर्वेद में आहार (आहार) और नींद (निद्रा) को अच्छे स्वास्थ्य का मुख्य स्तंभ माना जाता है, जो गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य अवधि को बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण हैं 9। आहार विहार (सचेत भोजन और जीवनशैली) का दर्शन सही समय पर, सही मात्रा में और सही वातावरण में भोजन करने पर जोर देता है, क्योंकि खराब आहार की आदतें बीमारी को ट्रिगर कर सकती हैं और उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को तेज कर सकती हैं 9।
नियमित दिनचर्या (दिनचर्या), योग, ध्यान, और अभ्यंग (मालिश) जैसी अभ्यास प्रणालियाँ शरीर, मन और भावनाओं के उचित समन्वय को बेहतर बनाने में मदद करती हैं, जिससे लंबी स्वास्थ्य अवधि को बढ़ावा मिलता है 9।
जराचिकित्सा के संदर्भ में, आहार-विहार, दिनचर्या और शोधन जैसे आयुर्वेदिक अभ्यास अंतर्निहित चयापचय और स्वास्थ्य को अनुकूलित करके पॉलीफ़ार्मेसी के जोखिम को कम करने में सहायता करते हैं। इन प्रथाओं के माध्यम से पाचन (अग्नि) में सुधार करके, रोगी अपच, अनिद्रा या कब्ज जैसी स्थितियों के लिए लक्षणात्मक आधुनिक दवाओं की आवश्यकता को कम कर सकते हैं, जिससे प्रतिकूल दवा प्रतिक्रियाओं को कम किया जा सकता है और वि-पर्चीकरण के आधुनिक लक्ष्य का समर्थन किया जा सकता है 9।
आधुनिक चिकित्सा के साथ आयुर्वेदिक सिद्धांतों का संयोजन: एक एकीकृत मॉडल
एक सफल एकीकृत जराचिकित्सा मॉडल वह है जहाँ आधुनिक चिकित्सा और आयुर्वेदिक सिद्धांत सहक्रियात्मक रूप से कार्य करते हैं। साक्ष्य यह बताते हैं कि आयुर्वेद का बहु-घटक जीवनशैली प्रणाली (आहार-विहार सहित) एक मूलभूत "मंच" (Platform) के रूप में कार्य कर सकती है 9। यह नींव शरीर, मन और भावनाओं के स्तर पर सभी प्रणालियों के सामान्य संतुलन और कार्यप्रणाली को बहाल करने के लिए काम करती है 9।
इस मजबूत आधार पर, आधुनिक एंटी-एजिंग दवाएं या लक्षित हस्तक्षेप—जो अकेले दिए जाने पर विफल हो सकते हैं—एक "संपूर्ण" चिकित्सीय प्रणाली के प्रमुख घटक के रूप में सफल हो सकते हैं 9। यह सहयोगात्मक दृष्टिकोण "जीवन में वर्ष जोड़ने और वर्षों में जीवन जोड़ने" के जराचिकित्सा लक्ष्य को सुनिश्चित करता है।
निष्कर्ष: जराचिकित्सा में भविष्य का मार्ग
जराचिकित्सा एक विशिष्ट अनुशासन है जो बुजुर्गों की जटिलताओं को पहचानता है और स्वतंत्रता तथा कार्यात्मक स्थिति को सर्वोपरि मानता है। भारत के संदर्भ में, जहाँ बहु-रुग्णता और वित्तीय बाधाएं व्याप्त हैं, जराचिकित्सा देखभाल का भविष्य एक औपचारिक, एकीकृत दृष्टिकोण में निहित है।
लाइफलाइन अस्पताल में हम वृद्धों की देखभाल की जरूरतों के प्रति संवेदनशील हैं और यदि आप चाहते हैं कि आपके प्रियजनों की बुढ़ापे में अच्छी देखभाल हो तो हम आपको हमसे संपर्क करने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।
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Elderly health: An Ayurvedic perspective - Herbal Reality